Friday, July 04, 2008

तुम हो एक हवा का झोंका

तुम हो एक हवा का झोंका

आओ के ना आओ तुम

कब से आंखें तरस रही हैं

अब तो दरस दिखाओ तुम


बाग़ बगीचे खिल उठते हैं

आहट तेरी पाते ही

फ़िर खामोशी छा जाती है

बस तुम्हारे जाते ही


सूख गयी हैं लब पंखुडियाँ

ओंस ज़रा टपकाओ तुम

मारू थल में पड़ा हुआ हूँ

आके प्यास बुझाओ तुम


बहुत हो गयी अब जुदाई

काटा बहुत अकेलापन

अब तो तुम ऐसे आ जाओ

फिर ना वापस जाओ तुम


तुम हो एक हवा का झोंका

आओ के ना आओ तुम

15 comments:

PARRY said...

Wow so u have gud command over hindi too. Read your poems. Seems like making music out of them too. hehehe.

Balvinder Singh said...

Thanks Parry. Yes that is the other side of the coin. But not getting enough time to write. That is why most of the compositions look incomplete.

Mampi said...

Parry, the incorrigible....
Chall Chakk guitar dobara...

Balvinder Singh said...

Hey Parry, let me know when you compose.

tulips said...

Kya baat hai, aap toh acche shayar bhi nikle! Your wife is so lucky to have u!

deepinder said...

ਸੁਆਦ ਆ ਗਿਆ,
ਬਹੁਤ ਖ਼ੂਬ !

Balvinder Singh said...

Thank you Tulips, but if you meet my wife you will start calling me lucky.

Deepinder , dhannwaad, your blog has a nice picture depicting 'giddhaa' but not showing any posts.

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

सुस्वागतम

रचना गौड़ ’भारती’ said...

बाग़ बगीचे खिल उठते हैं
आहट तेरी पाते ही
फ़िर खामोशी छा जाती है
बस तुम्हारे जाते ही

मिलना बिछुड़्ना अच्छा लगा
स्वागत है ।
मेरा ब्लोग भी देखें

नारदमुनि said...

subah subah hawa ke sath aanand hee aanand aaya kalyan ho vats
narayan narayan

दिगम्बर नासवा said...

बाग़ बगीचे खिल उठते हैं
आहट तेरी पाते ही
फ़िर खामोशी छा जाती है
बस तुम्हारे जाते ही

सुंदर कल्पना, अच्छा लेखन

मेरे ब्लॉग को भी देखें

Amit K. Sagar said...

ब्लोगिंग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लिखते रहिये. दूसरों को राह दिखाते रहिये. आगे बढ़ते रहिये, अपने साथ-साथ औरों को भी आगे बढाते रहिये. शुभकामनाएं.
--
साथ ही आप मेरे ब्लोग्स पर सादर आमंत्रित हैं. धन्यवाद.

प्रकाश बादल said...

स्वगतम्

Indyeah said...

This is a beautiful poem !Your words speak!:)

Balvinder Singh said...

Abhilasha, so you found out my other side.

Yes i get here once in while jab kabhee is bhagam bhaag se fursat miltee hai.

Tareef ke liye shukria