Saturday, April 21, 2007

फांसले बढते रहे

थी तमन्ना तुमको भी

हम आरजू करते रहे

चल रहे थे साथ

लेकिन फांसले बढते रहे


कुछ कहा, ना कुछ सुना

लेकिन ख्यालों मे ही हम

एक दूजे के लिए

कुछ सपन से घडते रहे


एक दिन इक मोड आया

जिन्दगी की राह पे

मुड़ गए हम अपनी अपनी

मुखतलिफ़ दिशाओं में


खो गए फिर एक बार हम

दुनिया की इस भीड़ में

सफ़र तै करने कि खातिर

बस यूंहीं चलते रहे


चल रहे थे साथ

लेकिन फांसले बढते रहे

3 comments:

Mampi said...

ਕਦੇ ਕਦੇ ਫਾਸਲੇ ਇੱਕ ਦੂਜੇ ਦੀ ਕਦਰ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਮਦਦ ਵੀ ਕਰਦੇ ਨੇ ।
ਬਹੁਤ ਸੁਹਣਾ ਲਿਖਿਐ ।

Balvinder Singh said...

You are right Manpreet, I have realised it after getting transfered to Calcutta leaving my family behind at Delhi.

but how did you type in Gurmukhi in the comment window.

J P Joshi said...

Chal rahein the saath
Lekin Faasle badte rahein

Wow!!! These lines capture many of life's sad and tragic moments. Thank God, as these hopefully constitute only moments and not a lifetime.