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Saturday, August 04, 2007

जब पहली बार देखा था तुम्हें

जब पहली बार देखा था तुम्हें

तुम घिरी हुई थी

अपनी सखियों में

और मैं अपने संबंधियों में

एक हल्की सी मुस्कान थी

तुम्हारे चहरे पे

शायद थोडी घबराहट भी

और उसी घबराहट में तुम

कभी उंगली पर दुपट्टा लपेटती ]

और कभी

उँगलियों को दबाती

अपने हाथों से ।

कितना जीं चाहा था

उन हाथों को उसी दम

अपने हाथों में ले लेने का और

मन ही मन वादा कर दिया था

उन हाथों को जीवन भर

थाम के रखने का