जब पहली बार देखा था तुम्हें
तुम घिरी हुई थी
अपनी सखियों में
और मैं अपने संबंधियों में
एक हल्की सी मुस्कान थी
तुम्हारे चहरे पे
शायद थोडी घबराहट भी
और उसी घबराहट में तुम
कभी उंगली पर दुपट्टा लपेटती ]
और कभी
उँगलियों को दबाती
अपने हाथों से ।
कितना जीं चाहा था
उन हाथों को उसी दम
अपने हाथों में ले लेने का और
मन ही मन वादा कर दिया था
उन हाथों को जीवन भर
थाम के रखने का
तुम घिरी हुई थी
अपनी सखियों में
और मैं अपने संबंधियों में
एक हल्की सी मुस्कान थी
तुम्हारे चहरे पे
शायद थोडी घबराहट भी
और उसी घबराहट में तुम
कभी उंगली पर दुपट्टा लपेटती ]
और कभी
उँगलियों को दबाती
अपने हाथों से ।
कितना जीं चाहा था
उन हाथों को उसी दम
अपने हाथों में ले लेने का और
मन ही मन वादा कर दिया था
उन हाथों को जीवन भर
थाम के रखने का