Monday, April 30, 2007

यही तो अब तक होता आया

मैंने तो सब सच ही कहा

लेकिन उन्हें यकीं ना आया

लगा दिया इलज़ाम ही उल्टा

बोले ये सब कहॉ चुराया


आंखों में आंसू जो देखे

बोले ये घड़ियाली हैं

उन अश्कों को क्या बोलेंगे

दिल जो अब तक रोता आया


मन ही मन में मैंने सोचा

इनका नही कुसूर है ये

मेरे सच के साथ हमेशा

यही तो अब तक होता आया

Saturday, April 21, 2007

हाथ में तेरा हाथ नहीं

कब तुमने यह हाथ छुडाया

इसका तो एहसास नहीं

लेकिन होश आया तो जाना

हाथ में तेरा हाथ नहीं


दुनिया भर की एशो-इशरत

यह मौसम यह बागो फूल

कुछ भी नहीं हैं इनके माहने

जब तक तेरा साथ नहीं

फांसले बढते रहे

थी तमन्ना तुमको भी

हम आरजू करते रहे

चल रहे थे साथ

लेकिन फांसले बढते रहे


कुछ कहा, ना कुछ सुना

लेकिन ख्यालों मे ही हम

एक दूजे के लिए

कुछ सपन से घडते रहे


एक दिन इक मोड आया

जिन्दगी की राह पे

मुड़ गए हम अपनी अपनी

मुखतलिफ़ दिशाओं में


खो गए फिर एक बार हम

दुनिया की इस भीड़ में

सफ़र तै करने कि खातिर

बस यूंहीं चलते रहे


चल रहे थे साथ

लेकिन फांसले बढते रहे