Saturday, November 15, 2008

रोज़ मिलते हें लोग


रोज़ मिलते है लोग

पास आते हैं

हँसते हैं, खेलते हैं

कुछ समझते भी हें

लेकिन ,

कभी इस तरह से

मिलता है कोई

छू जाता है

दिल के तारों को

गूँज उठता है संगीत फिर

गीत बन जाते हें बातों के

यह ज़िंदगी फ़िर लगती है

इक ग़ज़ल

और सारी दुनिया

इक महफिल

Thursday, November 13, 2008

ओ सुबह

हर दिन शुरू होता है

तेरे नाम के साथ

लालिमा बिखेर देती है

इक हल्की सी मुस्कान तुम्हारी

खिल उठते हैं फूल

चहक उठते हैं पंछी

फ़ैल जाता है उजाला

खुलती हैं जब आंखें तुम्हारी

और फ़िर

दिन चलते चलते 


थक जाता है 

ढल जाता है

सो जाता है


तुम्हारी याद लेकर

रात करवटें बदलती है

बस यही इक आस लेकर

की आओगी तुम

मुस्कुराती

इक नया सुहाना दिन

अपने साथ लेकर

ओ सुबह !!!