तुम हो एक हवा का झोंका
आओ के ना आओ तुम
कब से आंखें तरस रही हैं
अब तो दरस दिखाओ तुम
बाग़ बगीचे खिल उठते हैं
आहट तेरी पाते ही
फ़िर खामोशी छा जाती है
बस तुम्हारे जाते ही
सूख गयी हैं लब पंखुडियाँ
ओंस ज़रा टपकाओ तुम
मारू थल में पड़ा हुआ हूँ
आके प्यास बुझाओ तुम
बहुत हो गयी अब जुदाई
काटा बहुत अकेलापन
अब तो तुम ऐसे आ जाओ
फिर ना वापस जाओ तुम
तुम हो एक हवा का झोंका
आओ के ना आओ तुम
आओ के ना आओ तुम
कब से आंखें तरस रही हैं
अब तो दरस दिखाओ तुम
बाग़ बगीचे खिल उठते हैं
आहट तेरी पाते ही
फ़िर खामोशी छा जाती है
बस तुम्हारे जाते ही
सूख गयी हैं लब पंखुडियाँ
ओंस ज़रा टपकाओ तुम
मारू थल में पड़ा हुआ हूँ
आके प्यास बुझाओ तुम
बहुत हो गयी अब जुदाई
काटा बहुत अकेलापन
अब तो तुम ऐसे आ जाओ
फिर ना वापस जाओ तुम
तुम हो एक हवा का झोंका
आओ के ना आओ तुम