साल, महीने तो गुज़र जातें हैं
वक़्त के साथ,
वह तो कुछ लम्हें हैं
जो अटक जाते हैं
हलक में
और फ़िर काटे नहीं कटते हैं
उम्र भर
जब भी कभी कुछ दिल को छू जाता है तो लग जाते हैं पंख मेरी कल्पना को और उड़ निकलता हूँ ऊंचे आसमान में। तभी ज़िंदा हो उठती है कोई कविता या कहानी । यही तो है मेरी कल्पना की उड़ान