जब भी कभी कुछ दिल को छू जाता है तो लग जाते हैं पंख मेरी कल्पना को और उड़ निकलता हूँ ऊंचे आसमान में। तभी ज़िंदा हो उठती है कोई कविता या कहानी । यही तो है मेरी कल्पना की उड़ान